अंब्रेला एक्ट - विश्वविद्यालयों में एक समान स्वायत्त एवं उत्तरदायी प्रशासन की स्थापना हेतु उत्तराखण्ड सरकार का अहम कदम

के० के० पांडेय्

उत्तराखंड में वर्ष 1973 के बाद पहली बार विश्वविद्यालयों के लिए एक एकीकृत एक्ट 'अंब्रेला एक्ट' पारित किया गया है। अंब्रेला एक्ट के पास होने पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय द्वारा माननीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं माननीय उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ० धन सिंह रावत के प्रति आभार एवं हर्ष व्यक्त किया गया। 

इस अवसर पर कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो० एन० के० जोशी ने कहा कि वर्तमान में सभी राज्य विश्वविद्यालय अपने अलग-अलग अधिनियमों से संचालित हो रहे हैं। अब सभी राज्य विश्वविद्यालय इसी एक एकीकृत एक्ट से संचालित होंगे। इस एक्ट के तहत राज्य के सभी पोषित विश्वविद्यालयों में अब एक समान स्वायत्त एवं उत्तरदायी प्रशासन की स्थापना होगी।

उन्होंने माननीय उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ० धन सिंह रावत के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रदेश की भलाई और शिक्षा को और ऊंचे शिखर पर पहुंचाने के लिए अंब्रेला एक्ट मील का पत्थर साबित होगा। 

प्रो० जोशी ने बताया कि अंब्रेला एक्ट में कुलपतियों और कुलसचिवों की नियुक्ति, आयु सीमा, अर्हता का प्रावधान भी किया गया है। अंब्रेला एक्ट के तहत जहाँ अब कुलपति तीन वर्ष की अवधि या 70 वर्ष की आयु तक पद पर नियुक्ति पा सकेंगे वहीं कुलसचिव/उपकुलसचिव और सहायक कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति एवं स्थानांतरण की प्रक्रिया के साथ ही सेवा शर्तों में भी कुछ बदलाव कर उसे सरल किया गया है। यूजीसी मानकों के तहत 50 फीसदी पद विभागीय पदोन्नति से जबकि 50 फीसदी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। अन्य सेवा शर्तें राज्य सरकार के अनुसार होंगी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकारियों के चयन एवं अन्य सेवा शर्तों का भी अंब्रेला एक्ट में उपबंध किया गया है। प्रो० जोशी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि एक एकीकृत एक्ट से विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं के संचालन में भी एकरूपता आएगी।

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