माँ गंगा की अविरलता, निर्मलता और स्वच्छता को बनाये रखने हेतु "स्पर्श गंगा अभियान" 

पद्मश्री कल्याण सिंह रावत "मैती"

उत्तराखण्ड को देवभूमि कहा जाता है। अनेकों उतुंग हिमशिखर तथा उनसे निकलने वाली पावन नदियाँ इसकी आत्मा है। हरे-भरे वनों, बुग्यालों तथा सीड़ीनुमा खेतों के धरातलीय संरचनाओं से आवृत यह भूभाग सदियों से महान ऋषियों तथा महात्माओं का निवास स्थान रहा है। वेदों में इस भू-भाग को अरण्य प्रदेश भी कहा गया है। कवि कालिदास ने तो मेघदूत में इसे साक्षात जीवित प्राणी का ही दर्जा दे डाला। 

 

हिमालय से निःसृत ये अमृतमय नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने तथा जीवित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन उत्तराखण्ड राज्य के विद्वान एवं कर्मठ मुख्यमंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल 'निशंक' की पहल "स्पर्श गंगा" के रूप में प्रतिस्थापित हुई। उनकी मंशा के अनुसार इन नदियों को जीवित रखने तथा प्रदूषणमुक्त रखने का नैतिक दायित्व उत्तराखण्ड का है। चूँकि हमारे प्रदेश के हिमालय में स्थित हिमनदों से ये नदियाँ आकार पाती हैं। जब हम पहल करेंगे तभी हम देश-दुनिया को भी इस दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। 
 

8 दिसम्बर 2009 को राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश में राष्ट्रीय सेवा योजना के 300 कार्यक्रम अधिकारियों की कार्यशाला में गंगा नदी के तट पर माँ गंगा की अविरलता और स्वच्छता हेतु विचार-विमर्श किया गया। 17 दिसम्बर 2009 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल 'निशंक' के करकमलों द्वारा गंगा के किनारे मुनि की रेती ऋषिकेश में "स्पर्श गंगा अभियान" का श्रीगणेश किया गया। इस दिन प्रदेश के 40 हजार स्वयंसेवियों द्वारा इस कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए विभिन्न नदियों में स्वच्छता कार्यक्रम भी चलाया। 24 मार्च 2010 को दून विश्वविद्यालय देहरादून में माननीय मुख्यमंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल 'निशंक' की उपस्थिति में 500 राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारियों, समाज सेवियों, बुद्धिजीवियों एवं स्वयंसेवियों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम विधिवत शुरू किया गया। स्पर्श गंगा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक एवं उद्देश्यपरक बनाने हेतु दिनांक 4 अप्रैल 2010 को परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम ऋषिकेश में 10 हजार लोगों की महान उपस्थिति में देश के महान हस्तियों द्वारा इस कार्यक्रम को नैतिक एवं व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में बौद्धगुरु दलाई लामा, पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, योग गुरु रामदेव, पर्यावरणविद् पद्मभूषण श्री सुन्दरलाल बहुगुणा, स्वामी चिदानन्द मुनी, कथावाचक रमेश भाई ओझा सहित अनेक धर्मगुरुओं ने भाग लिया। यह इस कार्यक्रम के महान उद्देश्य के प्रति आस्था और समर्पण प्रदर्शित कर रहा था और  माँ गंगा की अविरलता और स्वच्छता हेतु डॉ० निशंक की सोच वास्तव में आकार लेने लग गई थी। 

कार्यक्रम का सकारात्मक एवं क्रियात्मक पहल गंगोत्री धाम से दिनांक 16 मई 2010 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ0 निशंक, पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी तथा स्वामी चिदानन्द मुनी के सानिध्य में दस हजार स्वयंसेवियों की स्वच्छता अभियान से हुआ। इसके पश्चात गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने का सिलसिला आगे बढ़ता गया। 16 मई को डॉ0 राजेश नैथानी द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम में, 10 जून 2010 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ0 निशंक के नेतृत्व में श्रीनगर में, 13 एवं 14 जून 2010 को प्रो0 प्रभाकर बड़ोनी के नेतृत्व में कण्डोलिया;पौड़ी में हजारों स्वयंसेवियों, छात्र-छात्राओं तथा विश्वविद्यालय के स्टाफ़ द्वारा वृहद स्वच्छता एवं जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। 27 जून 2010 को स्पर्श गंगा को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने के लिए सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री एवं नृत्यांगना हेमा मालिनी को स्पर्श गंगा अभियान का ब्राण्ड एम्बेसडर बनाया गया। "स्पर्श गंगा- एक दृष्टि" पुस्तिका जो गढ़वाल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ द्वारा प्रकाशित की गई थी उसका विमोचन भी किया गया। गढ़वाल मण्डल की राजधानी पौड़ी में जिलाधिकारी श्री दलीप जावलकर, जिला शिक्षा अधिकारी श्री वी.एस. नेगी तथा अन्य अधिकारियों सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों द्वारा प्रो0 प्रभाकर बड़ोनी के नेतृत्व में "स्पर्श गंगा वन" हेतु 200 गड्ढ़ों का निर्माण किया गया। 

 

स्पर्श गंगा अभियान की व्यापकता एवं लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि 17 दिसम्बर 2009 को गढ़वाल मण्डल के विविध नदी प्रक्षेत्र में 250 प्रभारी अधिकारियों के नेतृत्व में 25 हजार नौ सौ पचास स्वयंसेवकों, छात्र-छात्राओं तथा स्थानीय नागरिकों ने स्वच्छता कार्यक्रम में भाग लेकर गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ बनाने का कार्य किया। 17 दिसम्बर 2009 को राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के समन्वयक प्रो0 प्रभाकर बड़ोनी ने सरकार को एक दीर्घगामी दृष्टिकोण पत्र प्रस्तुत किया। 

 

वर्ष 2011 में गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ रखने तथा जन-जागरूकता को दृष्टिगत रखते हुए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न स्थानों में सम्पादित किये गये। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर 27 फ़रवरी को नैनीताल, 2 मार्च को देहरादून, 4 मार्च को देहरादून, 5 मार्च को पौड़ी, 7 मार्च को दून विश्वविद्यालय देहरादून, 13 मार्च को कोटद्वार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये जिनमें कुल मिलाकर 45000 प्रतिभागियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों पर स्कूली स्तर पर बच्चों में निबन्ध प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता तथा कला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन विभिन्न कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। स्कूल-कॉलेज में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए 10000 इको-क्लबों का गठन किया गया। स्पर्श गंगा की तीसरी वर्षगांठ पर पूरे राज्य में जागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ तथा स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें लगभग एक लाख 12 हजार छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त समय-समय पर पानी की गुणवत्ता पर केन्द्रित कार्यशाला एवं वृक्षारोपण के कार्यक्रम भी संचालित किये गये। 

वर्ष 2012 में भी इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने का रोड़ मैप तैयार किया गया था। विश्वविद्यालय स्तर पर पानी गुणवत्ता तथा प्रबन्धन पर गढ़वाल तथा कुमाऊँ में कई कार्यशालाएँ आयोजित की गई जिनमें पाँच सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिला पंचायतों तथा निकायों के लिए भी पृथक से प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया गया लगभग दो सौ प्रतिनिधियों ने इन कार्यशालाओं में भाग लिया। पृथ्वी दिवस पर पूरे राज्य में जागरूकता तथा स्वच्छता अभियान चलाने में लगभग एक लाख बच्चों ने प्रतिनिधित्व किया। गंगा तथा यमुना से जुड़े पंडितों, पुजारियों तथा धर्माधिकारियों में जन-जागरुकता के लिए हर्षिल, उत्तरकाशी तथा हरिद्वार में भी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इको-क्लब प्रभारियों के लिए भी बागेश्वर तथा अल्मोड़ा में भी कार्यशालाएँ आयोजित की गई। विश्व पर्यावरण दिवस पर भी गंगा स्वच्छता विषय को लेकर अनेक कार्यक्रम पूरे राज्य के स्कूलों में आयोजित किये गये। लगभग 5500 छात्र-छात्राओं ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया। 15 से 17 दिसम्बर 2012 को मुनि की रेती, टिहरी में स्पर्श गंगा अभियान का स्थापना दिवस मनाया गया। इसके अन्तर्गत अनेक प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम सम्पादित किए गए। एक लाख से ज्यादा लोगों एवं छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। 

13 जनवरी 2013 को राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज गौचर, चमोली जनपद के इको-क्लब प्रभारियों की एक कार्यशाला आयोजित की गई डेढ़ सौ से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। इसी प्रकार टिहरी के नगर पालिका ऑडीटोरियम में टिहरी के स्कूली इको-क्लब के प्रभारियों का प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ इसमें 220 अध्यापकों ने भाग लिया। एस.एस.बी परिसर ग्वालदम में नन्दा राज जात 2013 के परिप्रेक्ष में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्रीय जनता, स्कूली बच्चों तथा एस.एस.बी. के अधिकारियों, जवानों ने प्रतिभाग किया। लगभग 1700 लोगों तक इसका लाभ मिला। पृथ्वी दिवस पर स्पर्श गंगा अभियान के अन्तर्गत रैलियाँ तथा गोष्ठियों का आयोजन हुआ जिसमें 15000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। बागेश्वर में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2013 को मनाया गया 1200 से अधिक बच्चों ने इसमें भाग लिया। 

इस प्रकार उत्तराखण्ड राज्य में गंगा की पवित्रता, निर्मलता को बनाये रखने एवं प्रदूषण मुक्त करने हेतु "स्पर्श गंगा अभियान" एक सफ़ल  प्रयोग साबित हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ0 निशंक की यह पहल राज्य में काफ़ी लोकप्रिय हुई। इस कार्यक्रम से अन्य राज्य जो गंगा का स्पर्श करते हैं उन पर भी सकारात्मक प्रभाव दिखाई दिया। राष्ट्रीय मंच पर भी इस कार्यक्रम की काफ़ी प्रशंसा हुई। स्पर्श गंगा अभियान ने हर किसी के दिल को ही स्पर्श नहीं किया बल्कि गंगा के प्रति आस्था, विश्वास तथा समर्पण का भाव भी जागृत किया। डॉ0 निशंक ने इस अभियान को प्रभावी एवं उद्देश्यपरक बनाने के लिए "स्पर्श गंगा बोर्ड" का गठन किया गया था एवं राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ट, गढ़वाल विश्वविद्यालय के समन्वयक प्रो0 प्रभाकर बड़ोनी को जिम्मेदारी सौंप रखी थी। स्पर्श गंगा बोर्ड के सफ़ल क्रियान्वयन एवं प्रबन्धन हेतु हे0न0ब0 गढवाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के अधिकारी डॉ0 सर्वेश उनियाल एवं मुख्यमंत्री के तत्कालीन सलाहकार डॉ0 राजेश नैथानी को सम्मिलित किया गया था। 

स्पर्श गंगा अभियान की उत्तराखण्ड में सफ़लता के बाद इसे विस्तार देने का मन बनाया गया है। माननीय केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ0 रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने इस कार्यक्रम को पूरे देश के लिए उपयोगी जानकर राष्ट्रीय स्तर पर इसे गठित करने तथा संचालित करने का बीड़ा उठाया एवं इस हेतु पर्यावरण एवं हिमालय के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही प्रमुख भरतनाट्यम कलाकार एवं समाजसेविका आरुषि पोखरियाल को राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी है। आरुषि पोखरियाल इससे पूर्व उत्तराखण्ड सहित अनेक राज्यों में स्पर्श गंगा अभियान के प्रति जागरूकता एवं विश्वास पैदा करने में सफ़ल रही है। अपने ओजपूर्ण एवं प्रभावशाली व्याख्यानों के द्वारा छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण एवं निर्मलता हेतु प्रेरित कर चुकी हैं। 

 

अब राष्ट्रीय स्तर पर इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाकर पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में और मूल्यपरक कार्य सम्पन्न हो सकेंगे। पूर्व सफ़लताओं के आंकलन के आधार पर यह निश्चित है कि स्पर्श गंगा अभियान वैश्विक मंच पर भी अपनी विशेष जगह बनाने में सफ़ल होगा।     

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