उत्तराखंड में गुरुदेव के विचारों एवं दर्शन पर आधारित राष्ट्रीय एव वैश्विक उच्च शिक्षा संस्थान की आवश्यकता - डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

के० के० पांडे

शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया के तत्वाधान में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगारे का 159वाँ जन्मोत्सव कार्यक्रम इस वर्ष 7 मई 2020, को वेबिनार के माध्यम से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि, माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने दिल्ली स्थित आवास से गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर विश्वाभारती, शान्तिनिकेतन के विद्यार्थियों  द्वारा स्वस्ति-वाचन का उच्चारण कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरुप प्रदान किया गया। वहीं मुख्य अतिथि द्वारा शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया की नवनिर्मित वेबसाइट www.tagoretop.com का विमोचन कर गुरुदेव के दर्शन एवं मानवता की सेवा में उनके द्वारा किये गए कार्यों का देश और दुनिया के साथ साक्षात्कार कराया गया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशकं ’ ने कहा कि गुरुदेव ने भारत को ही नहीं वरन एशिया को साहित्य का पहला नोबले पुरूस्कार दिलाया और अपने मानवतावादी और प्रकृति प्रेमी दार्शनिक, शिक्षाविद, समाजसेवक की छवि के अनुरूप स्वयं को विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान पर सुशोभित किया।

उन्होने कहा कि गुरुदेव भारतीय संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर ले जाने वाले भारत के अग्रणी राजदूत थे जिनका जितना सम्मान देश के अन्दर होता है उससे कहीं ज्यादा दुनिया के अन्य देशों में प्राप्त है। अपनी 2017 में इंडोनेशिया की यात्रा का स्मरण करते हुए डॉ. निशंक ने कहा कि इंडोनेशिया में गुरुदेव के अनुयायी रामगढ़ उत्तराखंड में आकर उनकी विरासत को सरक्षित एवं संवर्धित करने के लिये अपना योगदान देना चाहते हैं। उन्होने उत्तर-प्रदेश सरकार में संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री रहते हुए रामगढ़, उत्तराखडं में गुरुदेव की इस विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने हेतु योगदान के बारे में बताते हुए कहा कि गुरुदेव ने रामगढ़ में शान्तिनिकेतन की स्थापना का स्वप्न संजोया था जिसे हमें यथार्थ रूप देने के लिए यहाँ वैश्विक स्तर का एक उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थान स्थापित कर साकार करना होगा।

उन्होने कहा कि आज जब दुनिया कोविड-19 महामारी का सामना कर रही है तब शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया द्वारा गुरुदेव की कर्मस्थली-तपस्थली से गुरुदेव के 159वें जन्मोत्सव पर आयोजित अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन सराहनीय है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखंड के जनपद नैनीताल में स्थित रामगढ़ वही स्थान है जहाँ गुरुदेव ने शान्तिनिकेतन की स्थापना का स्वप्न देखा था तथा गीतांजलि के रूप में गीतों की अंजलि पूरी दुनिया को समर्पित की थी।

गुरुदेव राष्ट्रीयता एवं मानवीयता के पुंज और समन्वयक थे। आज की परिस्थितियों में कोरोना से लडने के लिए मानव को कैसे योद्धा के रूप में तैयार किया जा सकता है, उसके लिए दुनिया को गुरुदेव की गीतांजलि की ही जरूरत है। मैं आशा करता हूँ कि इस अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी के माध्यम से मानवता की रक्षा को समर्पित गुरुदेव के गीतों की गूँज पूरी दुनिया को सुनाई देगी। 

गुरुदेव ने गाँवों के देश भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ग्रामीण पुनर्निर्माण के श्रीनिकेतन मॉडल की कल्पना की थी जिससे प्रेरित होकर भारत के माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया का पांच सूत्रीय वाक्यों पर आधारित विचार क्रियान्वित किया है जोकि दुनिया के सबसे बडे युवा देश भारत की समृद्धि का आधार बनने वाला है।


उन्होने रामगढ, उत्तराखंड में गुरुदेव के आदर्श एवं दर्शन पर आधारित सपनों के राष्ट्रीय एव वैश्विक उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हिमालय से जिस प्रकार गंगा उद्गमित होती है उसी प्रकार हिमालय से ही देश और दुनिया के कल्याण के लिए एक शिक्षा रुपी गंगा भी प्रवाहित होनी चाहिए। इस हेतु विस्वा-भारती तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए एक आदर्श संस्थान की स्थापना हेतु सहमति बनी है एवं उसके क्रियान्वयन के प्रयास जारी हैं। उन्होंने देश और दुनिया के स्तर पर गुरुदेव के जन्म-दिवस 7 मई को प्रतिवर्ष राष्ट्र-गान दिवस के रूप में मनाये जाने का समर्थन करते हुए शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया से इसकी शुरुआत आज से ही करने का आह्वाहन किया।


इससे पूर्व कार्यक्रम के आयोजक सचिव प्रो. अतुल जोशी ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं गुरुदेव के अनुनायियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। उन्होंने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए बताया कि गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर के जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन विगत 6 वर्षों से शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया, द्वारा गुरुदेव की कर्मस्थली रामगढ़, उत्तराखंड में जहाँ गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘गीतांजलि’ की रचना की थी और विस्वा-भारती, शान्तिनिकेतन की स्थापना का स्वपन देखा था, बड़ी धूमधाम से किया जाता रहा है, परन्तु कोविड-19 महामारी में लॉकडाउन के चलते इस वर्ष गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर का 159वां जन्मोत्सव कार्यक्रम, वेबिनार के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ट रूप का पश्चिमी देशों की संस्कृति से तथा पश्चिमी देशो की संस्कृति का भारतीय संस्कृति से साक्षात्कार कराने में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगारे की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनकी यह खूबी उन्हें वैश्विक मंच पर सर्वोच्च स्थान पर स्थापित करती है। हम सबका यह परम कर्तव्य है की गुरुदेव की कर्मभूमि जहाँ उन्होंने शान्तिनिकेतन की स्थापना का सपना संजोया था उस भूमि को दुनिया भर में फैले उनके अनुयायियों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आदि जिज्ञासाओं को दूर करने वाले शैक्षिक केंद्र के रूप में प्रतिस्थापित किया जाये।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. डी.पी.सिंह ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि गुरुदेव केवल एक साहित्यकार न होकर प्रकृति प्रेमी भी थे और उनकी पर्यावरण संरक्षण की दूरगामी सोच को आधार बनाते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयागे ने देश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विविध योजनाएं एवं पाठ्यक्रम प्रारंभ किये है, साथ ही ‘एक भारत श्रेष्ट भारत’ अभियान को सफलतापूवर्क संचालित किया जा रहा है। उन्होंने हिमालय में गुरुदेव के सपनों के अनुरूप शिक्षण संस्थान की स्थापना में उनके स्तर पर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।


कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त श्रीमती रिवा गांगुली दास ने वेबिनार को ढाका से संबोधित करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक सुखद अनुभव है जब गुरुदेव के द्वारा रचित राष्ट्रगान वाले दो देशों के लोग एक साथ गुरुदेव का जन्मोत्सव मना रहे हैं। उन्होने गुरुदेव को भारत का वास्तविक राष्ट्रदूत बताते हुए कहा कि यह गुरुदेव के बहुमुखी व्यक्तित्व का ही प्रमाण है। इसी के साथ उन्होंने गुरुदेव की रचनाओं में भविष्य की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

कार्यकम के समापन पर शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया के प्रन्यासी एवं विधायक माननीय श्री गोविदं सिंह कुंजवाल ने अतिथियों सहित सभी प्रतिभागियों का इस कार्यक्रम में प्रतिभाग एवं सहयोग देने के लिए आभार व्यक्त किया। इस अंतराष्ट्रीय वेबिनार में पूर्व विदेश सचिव श्री शशाकं, डॉ. सविता मोहन, डॉ. ज्योतिर्मयी गोस्वामी, डॉ. सर्वेश उनियाल, देवेन्द्र ढेला, देवेन्द्र बिष्ट, हेमंत डालाकोटी, नवीन वर्मा, डॉ. नवीन जोशी, डॉ. सुरेश डालाकोटी, डॉ. एस.डी. तिवारी, डॉ. पंकज उप्रेती, मोहन जोशी, दिलीप पॉल,  डॉ. एस.एस.यादव, चारु तिवारी, शुभम डालाकोटी, विनोद जोशी सहित गढ़वाल विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश-विदेश से शिक्षाविद एवं बड़ी संख्या में गुरुदेव के अनुयायियों ने प्रतिभाग किया।

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