दो राजनैतिक, साहित्यिक पुरेधाओं एवं गुरु-शिष्य का अविस्मरणीय संजोग 

भारत रत्न स्वर्गीय श्री बाजपेयी जी का अंतिम अविस्मरणीय सामाजिक कार्यक्रम

डॉ० निर्मला जोशी 

22 मई सन 2007 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के कथा संग्रह "खड़े हुए प्रश्न" का विमोचन पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी के कर-कमलों द्वारा हुआ था। अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम कार्यक्रम में स्वर्गीय बाजपेयी जी द्वारा अपने चिर-परिचित अंदाज में अविस्मरणीय, ओजस्वी व मंत्रमुग्ध करता उद्बोधन किया गया। 

अपने ऐतिहासिक अंतिम सम्बोधन में बाजपेयी जी द्वारा कहा गया कि आज समाज व राष्ट्र के प्रति अर्पण भाव को जागृत करने वाली रचनाओं के सृजन की आवश्यकता है और इस हेतु निशंक जी का योगदान सराहनीय है। उन्होंने कहा कि डॉ. ‘निशंक’ साहित्य के क्षेत्र में लगातार संघर्षरत हैं, वह आम आदमी के बस की बात नहीं है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि वे अपनी लेखनी के जरिए देश के नीति नियंताओं के समक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर अनेक प्रश्न खड़े करते रहेंगे।

इस अवसर पर डॉ0 ‘निशंक’ ने भावविहल होकर कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी का मुझे सदैव से स्नेह मिलता रहा, वर्ष 1991 में उनकी ही प्रेरणा से मैंने राजनीति में प्रवेश किया था एवं मुझे सदैव कविता एवम कहानियां लिखने के लिए प्रेरित करते रहे। डॉ0 ‘निशंक’ ने कहा, मैं जब भी श्रद्धेय वाजपेयी जी से मिलता हूँ, तो वह सबसे पहले मुझसे यही पूछा करते हैं कि आप कुछ लिख रहे हैं या नहीं? कुछ भी बंद कीजिए लेकिन लिखना मत छोड़िए। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए दौर को भी साझा किया। 

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