"जन्माष्टमी" के सुअवसर पर स्पर्श गंगा परिवार द्वारा इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय महिला महाविद्यालय, हल्द्वानी में वृक्षारोपण

नदी, कुंड, तालाब, झील, झरने, मंदिर, तीर्थ आदि के संरक्षण और उन्हें स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने का लिया संकल्प 

के० के० पाण्डेय्

शाश्वत प्रेम और प्रकृति के संरक्षण-संवर्धन का सन्देश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव "जन्माष्टमी" के सुअवसर पर स्पर्श गंगा परिवार के सदस्यों द्वारा इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय महिला महाविद्यालय, हल्द्वानी में वृक्षारोपण किया गया। कोरोना महामारी के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए पूर्ण सावधानी के साथ चंपा, गुड़हल के पौधों को परिसर में लगाया गया। 

वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्राचार्या डॉ० शशि पुरोहित ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्रकृति के सबसे बड़े रक्षक है और देव-प्रेत पूजा से हट कर प्रकृति से प्रेम करना सिखाते हैं। उन्होंने गोवर्धन पर्वत की रक्षा करके दुर्लभ वनस्पतियों का संरक्षण किया। कालिया नाग के दमन द्वारा समझाया कि नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। गाय, मोर, पक्षी, फसलें, पर्वत, कंदराएं और यमुना, जो भी भरण-पोषण करे, आपको संरक्षण दे, उसको प्रेम करना और उसके होने का सम्मान करना सिखाते हैं। 

पर्यावरणविद एवं स्पर्श गंगा अभियान के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ० एस० डी० तिवारी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण प्रकृति और पर्यावरण के परम उपासक है। उन्होंने इन्द्र पूजा का विरोध कर ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश देकर पूरे मानव समाज को प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्रांति का उद्घोष किया। श्री कृष्ण ने अपने जीवन दर्शन से समझाया कि प्रकृति की रक्षा सर्वोपरि है। यदि हम प्रकृति का संरक्षण-संवर्धन नहीं करेंगे तो हमारे लिए प्राकृतिक संसाधनों का संकट उत्पन्न हो जाएगा, इसलिए पृथ्वी का हरा भरा रखने के लिए वृक्षारोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल भी आवश्यक है। अर्थात मनुष्य का कर्तव्य है कि वह प्रकृति की न केवल स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखें बल्कि सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह अपने जीवन की रक्षा के लिए इनका संरक्षण करें। 

स्पर्श गंगा अभियान की सदस्य एवं कार्यक्रम संयोजिका छात्रा स्वाति जोशी ने कहा कि प्रकृति विरोधी आधुनिकता से पैदा हुई इस बेचैनी और व्याकुलता पर गंभीर चिंतन करने की जरूरत है। प्रकृति के दिव्य और परोपकारी स्वरुप को हम तब ही वापस ला सकते हैं, जब श्रीकृष्ण के प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन को नित्य धार्मिक कर्म की तरह अपने आचरण में आत्मसात करें। श्रीकृष्ण के प्रकृति प्रेम से जुड़े मूल्यों की स्थापना ही उनकी भक्ति की सार्थकता को तय करेगी। फिर बात चाहे जल शुद्धिकरण की हो या वन संपदा के रूप में प्राकृतिक विरासत को बचाने की, उन मूल्यों की पुनर्स्थापना जरूरी है। स्वाति जोशी ने बताया कि स्पर्श गंगा अभियान के सभी सदस्य नदी, कुंड, तालाब, झील, झरने, मंदिर, तीर्थ आदि के संरक्षण और उन्हें स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। 

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों डॉ० रजनी मेहरा, डॉ० संध्या गड़कोटी, डॉ० प्राची जोशी, डॉ० गीता पंत, डॉ० प्रभा शाह, डॉ० कैलाश जोशी, श्री बसंत रावत द्वारा भी वृक्षारोपण किया गया।  कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्पर्श गंगा अभियान की सदस्य छात्रा सृष्टि शर्मा, नूपुर गोयल, बबिता कार्की द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।

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