'रवींद्रनाथ टैगोर: चित्रों और शब्दों में जीवन कथा’पुस्तक का प्रकाशन 

मनोज पांडे

साहित्य एवं कला की दुनिया में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का नाम सुविख्यात है। ऐसे अद्भुत व्यक्तित्व किसी-किसी सदी में विरले ही जन्म लेते हैं। उनका कष्टोंभरा सादगीपूर्ण जीवन, सुसंस्कृत विचार एवं समृद्ध काम दुनियाभर में एक मिसाल हैं।


एक सफलतम, असाधारण एवं विद्वत व्यक्ति के जीवन को शब्दों में बाँधना हालाँकि एक कठिन काम है, लेकिन लेखक नित्यप्रिय घोष ने उनके महत्वपूर्ण प्रसंगों से चुन-चुनकर, शब्दों एवं चित्रों में उनकी इस गाथा को पिरोया है। 'रवींद्रनाथ टैगोर: चित्रों और शब्दों में जीवन कथा’पुस्तक का प्रकाशन नियोगी बुक्स की बहुवचन श्रृंखला के अंतर्गत किया गया है।

लेखक एवं प्रकाशक, दोनों का यह प्रयास इसलिए भी सार्थक भी कहा जा सकता है, क्योंकि रवींद्रनाथटैगोर के जीवन से जुड़ी ऐसी विशिष्ट किताब साहित्य की दुनिया में अनुपम है। निश्चित तौर पर यह साहित्य प्रेमियों के लिए प्रिय एवं शोध से जुड़े छात्रों के लिए सहायक संदर्भ पुस्तक साबित हो सकेगी। पुस्तक की पृष्ठ संख्या 236 है और पृष्ठों की गुणवत्ता भी उच्चस्तरीय है।

पुस्तक में कवि की भूमिका;एक पुत्र, भाई, पति और पिता के रूपमें, काफी सराहनीय रही है। देश-विदेश में ह्रदयस्पर्शी कविताओं, कहानियों और नाटकों से विश्वस्तरीय प्रतिभाओं को लुभाया है। जोड़ासांको के भव्यआवास में उनके जन्म से लेकर उनके अंतिम दिनों तक की यात्रा को बड़े ही खूबसूरत और निर्मलढंग से पेश किया गया है। यही नहीं, इस किताब में प्रकाशित हर एक दुर्लभ तसवीरें उनके जीवनका क़रीब से आभास कराती हैं।

इसके अतिरिक्त, हमें बंगाल, भारत और विश्व के उन स्थानोंका भी वर्णन मिलता है, जहाँ दार्शनिक कवि एवं गुरु ने दौरा किया। कवि के जीवन में घटित कई उन घटनाओं कावर्णन भी हमें मिलता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह किताब अपने आप में ही एक ऐसा संपूर्ण जीवन है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने हर परिस्थिति में सहर्ष स्वीकार किया है।

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