भारत और इंडोनेशिया मिलकर मनाएंगे रामगढ़ (नैनीताल) में टैगोर जयंती

विनोद जोशी 

भारत और इंडोनेशिया शीघ्र ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती उत्तराखंड के रामगढ़ (नैनीताल) में मनाएंगे टैगोर ने अपने महान ग्रंथ गीतांजलि की रचना रामगढ़ में ही की थी गुरुदेव की इंडोनेशिया यात्रा की 90वीं वर्षगांठ पर इंडोनेशिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी 

 

भारत की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर भारतीय संस्कृति और चिंतन पर व्याख्यान दियाइस मौके पर उन्हें साहित्य सृजन, स्पर्श गंगा अभियान और हिमालय संरक्षण कार्यों के लिए सम्मानित भी किया गया

इस अवसर पर इंडोनेशिया स्थित भारतीय दूतावास द्वारा गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन भी डॉ० निशंक द्वारा करवाया गया।

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की कर्मस्थली ”टैगोर टॉप“ को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु डॉ० निशंक हमेशा से प्रयासरत रहे है।  इंडोनेशिया सरकार के शिक्षा संस्कृति मंत्रालय और सर्जनवीयता विश्वविद्यालय द्वारा 16 सितम्बर 2017 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में भी मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० रमेश पोखरियाल "निशंक" द्वारा अपने उद्घाटन भाषण में कहा “मैं हिमालय की धरती से आया हूँ जो वेद, पुराण,उपनिषद, गंगा, यमुना की भूमि है और रबीन्द्रनाथ टैगारे की विश्वविख्यात कृति गीतांजलि की भी सृजन भूमि है। भारत की भूमि अध्यात्म की भूमि है, भारत की संस्कृति वैश्विक संस्कृति है, जो पूरे विश्व को दिशा दे सकती है। दुनिया का निराश व्यक्ति भारत की भूमि में शांति की खोज के लिए आता है।”

इंडोनेशिया से लौटने पर देहरादून में पत्रकारों से बातचीत में निशंक ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया ने इस बात पर सहमति दे दी है कि टैगोर जयंती पर रामगढ़ में भव्य आयोजन होगा, जो विश्वभर के लिए प्रेरणास्पद होगा। उन्होंने कहा कि भारत व इंडोनेशिया की संस्कृति पूरे विश्व को जीवन की राह दिखाती है। इंडोनेशिया का सर्वधर्म समभाव एक आदर्श है। इस देश में 90 फीसद मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वह भारतीय संस्कृति की अनुयायी है। वहां इस्लाम धर्म है तो हदू संस्कृति भी। उसकी विमान सेवा गरुड़ है तो मुद्रा में गणेशजी समेत अन्य देवी-देवताओं के चित्र हैं। विश्वविद्यालयों में ब्रह्माजी की मूर्तियां स्थापित हैं। इंडोनेशिया की रामायण और रामलीला की प्रस्तुतियां विश्वभर में विख्यात हैं।

डॉ० निशंक ने बताया कि इंडोनेशिया के गज्जा माडा विवि के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत में उनकी पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी सहमति बनी। सेमिनार के दौरान निशंक के लघु कहानी संग्रह का विमोचन भी हुआ।

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Ramgarh (Uttarakhand), India