पुस्तक समीक्षा -'मेकिंग ऑफ़ न्यू इंडिया' ट्रांसफॉर्मेशन अंडर मोदी गवर्नमेंट 

डॉ० केतकी तारा कुमय्यां 

अभी हाल ही मैं दुनिया ने 'विश्व पुस्तक दिवस 'मनाया और यह इसलिए भी खास रहा क्योंकि लॉकडाउन मे पुस्तक प्रेमियों ने इसमें बढ़ -चढ़कर रूचि दिखाई। यह कहना अति शयोक्ति न होगा कि इस लॉकडाउन में किताबें सभी के लिए एक देवीय उपहार साबित हुयी जिसने जड़ हो चुकी इच्छाओं को जीवंत कर दिया। 

 

प्राचीन विचारक सिसेरो ने बहुत ही स्पष्ट रूप से कहा है कि 'पुस्तकों के बिना कमरा 'आत्म रहित शरीर के समान है और उनके ये शब्द चिरकाल तक प्रासंगिक भी रहेंगे। इसी परिवेश को ध्यान में रखते हुए मैने मेकिंग ऑफ़ न्यू इंडिया - ट्रांसफोर्मेशन अंडर मोदी गवर्नमेंट (मेकिंग  ऑफ़ न्यू इंडिया -ट्रांसफॉर्मेशन अंडर मोदी गवर्नमेंट) का अध्ययन कर समीक्षा की है जोकि विबेक देबराय (वर्तमान अध्यक्ष, आर्थिक  सलाहकार परिषद), अनिर्बान गाँगुली (निर्देशक, डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन) एवं किशोर देसाई (विशेष कार्य अधिकारी) द्वारा संपादित है। 

वैसे तो साहित्यक क्षितिज में प्रधानमंत्री मोदी को कई पुस्तकें समर्पित कि गई है जो कि अभिभूत करती है। पं. नेहरू और इंदिरा गाँधी के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री पर इतना साहित्यिक मंथन और विमर्श हुआ है तो वह वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ही होंगे। यह पुस्तक मोदीजी और उनकी नीतियों पर आधारित बेहतरीन अनुभवमूलक कृति है जिसके तहत उनके सुधारों की पहल को न केवल पारदर्शिता के साथ बल्कि सावधानीपूर्वक निष्पक्षता के साथ समझाया गया है।  शब्दों का आयाम दृढ़ता से बताता है कि मोदी सरकार  के तहत कैसे व्यवहारमूलक नीतियों को न केवल अपनाया गया है बल्कि धरातल पर उतारा भी गया है और उन्हें मूर्त रूप भी दिया गया है।  मुलतः यह संकलन 51 विषय विशेषज्ञों के निबंधों का एक बौद्धिक नतीजा है जिसमें मोदीजी और उनके 'सुधार प्रदर्शन और परिवर्तन 'पर आश्रित नीतियों की विवेचना की गई है और इसी के साथ समीक्षा की गई है की कैसे इन नीतियों ने भारतीय व्यवस्था को एक नई स्फूर्ति एवं गत्यात्मकता प्रदान की है। 

संपादक : 

बिबेक देवराय,अनिर्बन गाँगुली, किशोर देसाई 
भाषा : अंग्रेजी  ;       मूल्य : 995/-

जहाँ तक इसके विषयगत सामग्री का संबंध है, इस पुस्तक को सहजता के लिए 3 भागों में विभाजित किया गया है जिसमें पहला अवलोकन (Overview ), दूसरा आंतरिक दृश्य (The Inside View ) और तीसरा बाह्य दृश्य (The Outside View )है । अध्ययन करने पर पाया गया है कि प्रत्येक भाग मोदी सरकार कि घरेलू एवं अतिराष्ट्रीय स्तर की नीतियाँ का गंभीर आँकलन करता है और उन सार्थक कारणों को भी बताता है जिसने विश्व को  विस्मय में डाल दिया है। मोदीजी की दूरदर्शी नीतियों के द्वारा कैसे अर्थव्यवस्था, सामाजिक समावेश के प्रयास, सामाजिक निवेश, कूटनीति, सुरक्षा मुद्दों इत्यादि जैसे ज्वलंत मुददों व उनसे सम्बंधित नीतियां पर गहरा चिंतन व मूल्यांकन इस रचना में किया गया है।     
 

संकलित पुस्तक का पहला भाग मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालता है। 8 सधे लेखो के माध्यम से बताया गया है कैसे 'NaMo' प्रभाव से भारत दूसरे पुर्नजागरण का गवाह बन रहा है। इस भाग में बताया गया है कैसे नवाचार, पारदर्शिता और जवाबदेही को मूल मंत्र बनाते हुए मोदी सरकार ने अपना परचम फहराया है। इसमें जीएसटी, जनधन खाता, आधार कार्ड योजना, उज्वला योजना की विवेचना की गई है। दूसरा हिस्सा 'न्यू इंडिया 'में मोदीजी की घरेलू नीतियों के प्रभाव को उजागर करता है। 33 अनुभवजन्य लेखों से यह खण्ड, मोदी सरकार द्वारा अरबों लोगो के लिए क्रियान्वित बैंकिंग सुधार, राजकोषीय नीति सुधार, अचल सम्पति में जवाबदेयता, उच्च शिक्षा में सुधार इत्यादि पर जोर देता है और 'सबका साथ सबका विकास 'द्वारा 'संकल्प से सिद्धि 'तक की बात करता है। अंतिम भाग अपने 10 कौशलपूर्ण लेखों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में मोदी सरकार की  प्रचलित लोकप्रिय  नीतियां प्रस्तुत करता है। यह खण्ड दर्शाता है कि कैसे भारत अपनी पूर्व नर्म छवि को त्यागकर अब एक कठोर एवं मजबूत शक्ति में परिवर्तित हो गया है। आज भारत विभिन्न रेटिंग एजेंसीज जैसे मूडीज,( S&P) और फिच द्वारा अनुमानित एशियाई शताब्दी के लिए एक आशाजनक दावेदार के रूप में उभर रहा है। आगे यह खण्ड यह भी रेखांकित करता है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने 'लुक ईस्ट ' नीति के रवैये की जगह 'एक्ट ईस्ट ' अपना और अपने पड़ोसी देशों की नीतियों को 'रिसेट ' कर अपने संबंधों को मजबूती के साथ पुर्नपरिभाषित कर रहे है।  


कुल मिलाकर मोदी शासन के तहत जो 'न्यू इंडिया 'आकार ले रहा है, उसको यह पुस्तक बेहतरीन तरीके से प्रतिबिंबित कर्ति है। विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखें तो इस पुस्तक ने विषय को अत्यंत स्पष्टता और व्यावहारिक रूप से विवेचना की है। यह पुस्तक केवल शिक्षाविदों के लिए ही नहीं महत्वपूर्ण है वरन हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत को  नवीन कलेवर 'न्यू इंडिया में परिवर्तित होते हुए देख कर  प्रत्यक्षदर्शी बन रहा है।

लेखिका पर्यावरण संरक्षण, महिला जागरूकता अभियान आदि में सक्रियता से प्रतिभागिता करती रही है एवं पहाड़ के विकास व नियोजन, पर्यावरण तथा संस्कृति विषयों पर सतत लेखन करती है। वर्तमान में डी0एस0बी0 परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के राजनीति शास्त्र विभाग में सहा0 प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। 

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