स्वतंत्रता दिवस पर विशेष आमंत्रित आलेख 

आत्मनिर्भर भारत – स्वतंत्र भारत

प्रो० एन० के० जोशी 
कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल

पूरा देश आज 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 200 साल की लम्बी लड़ाई के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश हुकूमत से पूर्ण रूप से आजादी मिली। स्वतंत्रता दिवस, ब्रिटिश शासन के अंत और स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र की स्थापना का प्रतीक है। इस दिन से सभी भारतीयों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन हर भारतवासी अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करता है, जिनके खून-पसीने और संघर्ष से हमें आजादी नसीब हुई। इन 73 सालों में भारत ने विश्व समुदाय के बीच एक आत्मनिर्भर, सक्षम और स्वाभिमानी देश के रूप में अपनी जगह बनाई है। सभी समस्याओं के बावजूद अपने लोकतंत्र के कारण वह तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बना रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति और विकास दर भी अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरक तत्व बने हुए हैं। 

मेरा मानना है कि स्वतन्त्रता चार उपादानों में निहित है- 1. स्वदेशी, 2. स्वाधीन, 3. स्वावलम्बी, 4. स्वाभिमानी। अतः स्वतन्त्रता को बनाये रखने के लिए स्वदेशिता, स्वभिमानिता, स्वाधीनता एवं स्वावलम्बन को अपने निजी जीवन में उतारना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आत्मनिर्भर भारत का सपना स्वदेशी, स्वावलम्बन और स्वाधीनता को बल प्रदान करेगा। आत्मनिर्भर होने से आत्मबल का विकास होगा। जैसा कि उपनिषद में कहा गया है- "नायं आत्मा हीनेंन लभ्यः" अर्थात् यह आत्मा बलहीनों को नहीं प्राप्त होती है। कहने का तात्पर्य है कि बिना आत्मबल के सफलता अर्जित नहीं की जा सकती है। यही आत्मबल राष्ट्र के विकास में अहम् भूमिका निभाता है। यही आत्मनिर्भर भारत, स्वतन्त्रता का असली परिचायक होगा। 

वस्तुतः आत्मनिर्भरता सदैव ही भारत का लक्ष्य रहा है, परंतु वैश्विक महामारी COVID-19 के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने से इस दिशा में गंभीरता के साथ प्रयास करने की आवश्यकता को महसूस किया गया। आपदा को अवसर में बदलने के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के हर नागरिक को एक नई सीख दी। यह अत्यंत सुखद है कि वर्तमान में माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। आत्मनिर्भर योजना के आने से ऐसा लग रहा है कि देश के हर नागरिक के अंदर जो प्रतिभाएं छिपी हुई थीं वो बाहर निकलकर आ रही है। और तो और इससे हमें अपनी क्षमता का भी पता चला।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से प्रभावित लोगों, अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि एवं उद्योगों के लिए 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये के एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करके आत्मनिर्भर भारत के अभ्युदय का सूरज उगाया है। उन्होंने इसके माध्यम से न केवल सुदृढ़ नये भारत बल्कि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प व्यक्त किया है। इसके माध्यम से भारत के भाल के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा जायेगा। भारत एक ऐसे राष्ट्र बनने की ओर डग भर रहा है जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। सबके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा और उन्नति के समान और सही अवसर उपलब्ध होंगे। 

यह स्वतंत्र दिवस इसलिए भी विशेष है कि 34 वर्षों के लंबे समय के इंतजार के बाद देश को नई शिक्षा नीति मिली है, जो न केवल विदेशी भाषा की जंजीरें तोड़ने वाली है, बल्कि देश को विकास की राह पर ले जाने के लिए उत्पादकता को बढ़ाने वाली है। नई शिक्षा नीति पाठ्येतर क्रियाकलापों और वोकेशनल शिक्षा पर जोर देती है। नई शिक्षा नीति युवाओं की बड़ी तादाद के लिए स्वरोजगार और स्व-उद्यम की दिशा में उपयोगी साबित होगी। अनुसंधान की दिशा में भी भारत को ठोस कार्य करने की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी। राष्ट्रीय अनुसंधान न्यास की स्थापना इस दिशा में एक क्रांतिकारी संकल्पना है। इसमें उच्च गुणवत्ता के शोध एवं अनुसंधान को नई गति मिलेगी। विश्वास है कि ये परिवर्तन करोड़ों की संख्या वाले भारतीय छात्र समुदाय के सपनों को पंख देगा।

इस साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और मुंबई से कोलकाता तक हम सब एक साथ मिलकर इस वायरस से लड़ रहे हैं और यही हमारी अनेकता में एकता को दर्शाता है। जब भी देश और इसके लोगों पर मुश्किल आए हम एक साथ होते हैं और ये वहीं समय है। 

आइये हम सब इस 74वे स्वतंत्रता दिवस पर शपथ लेते हैं कि अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिर्फ अपने देश में बनी वस्तुओ का इस्तेमाल करेंगे और जहाँ तक हो सके विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करेंगे। इसी के साथ आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई !

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